विचार सेतु

संघ की पहली शाखा की कहानी भूतिया घर ‘मोहिते का बाड़ा’ में गूंजा- नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

अंधविश्वास और राष्ट्रनिर्माण का संगम भारत की धरती रहस्यों से भरी हुई है। कहीं प्राचीन किलों और हवेलियों में लोककथाएं जीवित हैं, तो कहीं पुराने खंडहरों में डरावनी कहानियां लोगों को अपनी ओर खींचती हैं। महाराष्ट्र के पुणे शहर का मोहिते का बाड़ा भी ऐसा ही एक स्थान है, जो वर्षों से ‘भूतों का अड्डा’…

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जागरूक रहें स्वस्थ्य रहें – स्वस्थ जीवनशैली दवा से अधिक लाभकारी

दुनिया में एक बड़ी आबादी डायबिटीज से पीड़ित है। डायबिटीज को कई रोगों की जननी भी माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना एंटी डायबिटीज दवा मेटफार्मिन के उपयोग से अधिक प्रभावी है और इसके लाभ 20 वर्षों बाद भी बने रहते हैं। 1996 में शुरू किए गए यूएस डायबिटीज प्रिवेंशन…

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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हमारा भारत

‘अमृतकाल में विकसित भारत की आधारशिला केवल और केवल स्वदेशी व आत्मनिर्भरता के माध्यम से ही तय हो सकती है। देश की सुरक्षा की तैयारियों से लेकर सेमीकंडक्टर चिप बनाने तक और खेती के लिए जरूरी उर्वरक बनाने से लेकर 10 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने तक का लक्ष्य केवल और केवल देश की आत्मनिर्भरता…

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फुस्स हो गया कांग्रेस के ‘युवराज’ का एटम बम!

आखिरकार, कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी का एटम बम ‘फुस्स’ हो गया। शुरूआती दिनों में देश से लेकर विदेश तक करोड़ों लोगों को बेसब्री से इंतजार था कि राहुल गांधी कोई बड़ा धमाका करेंगे। कथित वोट चोरी के मामले में राहुल गांधी जिस तरह से उछल-कूद कर रहे थे, निश्चित ही उनके पास कोई बड़ा…

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संघ को समझने का सुनहरा अवसर है शताब्दी वर्ष

‘संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो भला हो जिसमें देश का वो काम सब किए चलो’ इस ध्येय को लेकर चलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  अपने शताब्दी वर्ष  में प्रवेश कर चुका है। अपनी इस गौरव पूर्ण यात्रा में  संघ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। संघ को पीछे धकेलने के कई बार प्रयत्न हुए।…

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बिहार विधानसभा चुनाव – बिछ गई बिसात :किसकी शह किसको मात

विश्व में सबसे पहले बिहार की धरती से ही लोकतांत्रिक विचारधारा की परिकल्पना का उदय हुआ था। वैशाली गणराज्य की जनतांत्रिक सोच व शासन व्यवस्था ने तब दुनिया की सभी शासन व्यवस्थाओं को अपनी ओर आकर्षित कर पुष्पित पल्लवित किया। बाद के वर्षों में विश्व के अधिकांश देशों ने शासन के लोकतांत्रिक स्वरूप को अपनाया…

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महिला-बच्चों को बनाया मोहरा, एक हाथ पोस्टर एक हाथ पत्थर

आई लव मोहम्मद के नाम पर अघोषित जेहाद का कपट भरा चेहरा एकबार फिर देश के सामने आया है। देश को अराजकता के आग की भट्ठी में झोंकने की ये वो गहरी साजिश थी, जो समय रहते ही पकड़ में आ गई। देश एक बार फिर तबाही वाले दंगे की चपेट में आने से बच…

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नेतागिरी की पाठशाला नहीं सेवा और संस्कार का केंद्र

जहां राजनीति को अक्सर सत्ता का माध्यम माना जाता है, वहीं कुछ संस्थाएं ऐसी भी हैं, जो सेवा और उत्तरदायित्व को सर्वोपरि मानती हैं। महाराष्ट्र के ठाणे (मुंबई) स्थित रामभाऊ प्रबोधिनी एक ऐसी ही संस्था है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित युवाओं को तैयार करने का कार्य कर रही है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – सृजन और संघर्ष के 100 साल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भारतीय समाज के पुनर्गठन की वह प्रयोगशाला है जो विचार, सेवा और अनुशासन के आधार पर एक सांस्कृतिक राष्ट्र के निर्माण में जुटी है। 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की अनोखी भारतीय दृष्टि से उपजा यह संगठन आज अपनी शताब्दी के द्वार पर खड़ा है। यह केवल संगठन विस्तार की…

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