दीपावली और जुए की दोस्ती-यारी कब से है ना तो इसका मेरे पास कोई ऐतिहासिक प्रमाण है और ना ही दिल्ली लखनऊ के सूचना और गोपनीय विभाग से जारी कोई औपचारिक दस्तावेज या घोषणा पत्र। व्यवहारिकता और लोकाचार के तकाजे से इन दोनों के गहरे और अमिट-अनंत संबंधों की पुष्टि होती है बस। वैसे भी दीपावली में तो शायद पैसे रुपए जेवर,सामान आदि ही दांव पर लगते हों पर घर-बाहर दफ्तर अब तो हर जगह ही किसी न किसी का कुछ ना कुछ दांव पर लगा हुआ है। सीधे-सीधे आते हैं जुआरी भाई लोगों के मामले पर,मधुशाला की तरह जुएं का अड्डा भी भारतीय संविधान की मंशानुरूप धर्म निरपेक्षता,एकता, भाईचारे और समानता का जीता-जागता जीवंत प्रतीक है,जैसे न्यायालय के फैसले के बाद पक्ष-विपक्ष गौण हो जाता है और जीत संविधान की मानी जाती है ठीक उसी तरह जुए में हारे-जीते कोई,जीत अंतत: जुआ देवता की होती है। जुआं देवता संबोधन पर मुझे स्त्री विरोधी न समझा जाए क्योंकि अव्वल तो जुआं शब्द पुल्लिंग है,दूसरी बात इसमें स्त्रियों की भागीदारी बेहद कम है लगभग न के बराबर दिखी मुझे लिहाजा जुआ देवता न की जुआं माईया।
बहरहाल सालाना बोनस की तरह जुंआरी भाई लोग दीपावली पर जुआ खेलने का इंतजार करते हैं,और हां एक विशेष बात,मैं यहां पर रेगुलर या बारहमासा जुआरियों की बात कतई नहीं कर रहा जो साल भर जुए की फड़ पर फड़फड़ाते रहते हैं,मैं तो उन सभी की बात कर रहा हूं जो त्योहारी मौज-मस्ती के लिए जुआ खेलते हैं। खैर दुनिया धनतेरस के दिन खरीदारी करती होगी बर्तन जेवर लाई लावा मिठाई आदि यह जुआरी भाई लोग जय जुआ देवता कहते हुए ताश के पत्तों की कई गड्डियां एक साथ खरीदते हैं।अरे भाई अनुभव भी तो कोई चीज होती है लिहाजा खेल के दौरान होने वाली चिराईन और चूं चपड़ में होम होने वाली गड्डियों में यह विशेष रिजर्व ही काम आता है और तो और कई बार किसी की इच्छा कटिंग की तो कुछ की तीन पत्ती की होती है, सो मौके पर कौन खरीदने जाए।
मोहल्ले के साथ्त हिंदुस्तानी राजू, गुड्डू, नाटे मियां,मोन,चिंटू,बबलू डीलर और एस.पी. भाई एक जगह पर एक साथ इकट्ठे हुए। एसपी भाई के घर के पीछे बने गोदाम में रोज जुआं खेलने की सर्व-सहमति बनी, सुबह शाम का शेड्यूल तय हुआ साथ ही आसपास के लुच्चे-लफंगे और प्रोफेशनल जुआरियों की नजरों से बचकर इकट्ठा होने की जुगत लगाई गई। एस.पी. भाई बोले-चिंता की कोई बात नहीं इलाके के दरोगा-सिपाही से गले मिलाप का सिलसिला मैंने बढ़ा दिया है, लॉकडाउन के समय से ही, साथ ही इन दिनों रास्ते बदल-बदल कर नमस्ते ठोकता रहता हूं,मिठाई नमकीन अलग।
तभी नाटे मियां बोले- भाई बाईक कहां रखेंगे हम लोग गोदाम में तो जगह है ही नहीं,रास्ता भी संकरा है! बबलू डीलर लप से बोले-पगलेठ न बनो आधा दर्जन बाईक खड़ा करना बिल्ली को दूध का न्योता देने जैसा है। राजू बोले-हम इतनी दूर से पैदल आएंगे और बिल्ली दूध ई सब का है! सीधा-सीधा समझाओ भाई। बबलू डीलर दार्शनिक अंदाज में बोले- सावन के अंधे की तरह दीपावली के मौसम में भीड़ भाड़ का मतलब और वह भी करोना के समय जब हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग के कानून लागू है जुए की खड़ी फसल पुलिस हमेशा काटै के लिए तैयार रहती है,और अगर बाइक में इसी तरह बैठकर आओगे तो पक्का सरकारी जीप में बैठकर जाओगे और जुआ के साथ-साथ करोना के नाम पर 50 धारा अलग। सहमति बन गई। शाम तक सभी खिलाड़ी एस.पी.भाई के गोदाम में बारी-बारी से पहुंचे, बकायदा मास्क लगाए,जेब में दो-दो सैनिटाइजर ठूंसे। जय जुआ देवता के उद्घोष के साथ ही ताश की फेटाई शुरू हो गई।
हंसी-मजाक के बीच जुए का दौर चल पड़ा, बबलू बोले-अबे अब तो मुंह से हटाए लो मास्क कि अंदर हव आऊर ई बार-बार सेनेटाइजर के छिड़काव बंद करो में उलझन होत है, अब जो होई सो होई। गुड्डू बोले-मोनू और चिंटू तो आज तक एक पैसा ब्लाइंड पर नहीं लगाए ट्रेल,रन और कलर के बिना तो यह दोनों चाल ही नहीं चलते। मोनू और चिंटू बहुत खिसियाये है पर बाकी सब ने समर्थन कर दिया। मोनू खिसिया के बोल पड़े जब भगवान आंख देखे खातिर दिए हैं मूंदै खातिर नहीं।

इतने में ही एक बुलेट मोटरसाइकिल की हल्की-हल्की आवाज सबने एक साथ महसूस की। धीरे-धीरे यह आवाज करीब और करीब होने लगी और सब का कलेजा मुंह को आने लगा कुछ तो अभी इसी लॉकडाउन के दौरान फर्जी घूमने-फिरने की खुशी में आगे पीछे बहुत डंडा पाए थे। बहरहाल धड़कन बंद हो इससे पहले पत्ते छुपा दिए गए। एस.पी. भाई सबका चेहरा देखते हुए मन ही मन बुदबुदाये, इतना चाय-नाश्ता सब कराए सरवा नमक की कोई वैल्यू ही नहीं रही। जुबान का कोई मतलब ही नहीं नहीं रहा। भैया ईमानदारी नैतिकता नाम की चीज अपने भारत आई नहीं। तभी बुलेट की आवाज एकदम गोदाम के मुहाने पर आकर थम गई इधर सबकी सांसे थमने और होंठ सिलने लगे। तभी मुहाने से आवाज आई, कल्लू मिस्त्री।
एसपी आवाज पहचान गए और सब को आश्वस्त कर दरवाजा खोले। पहले तो कल्लू के मुंह पर मास्क देखकर नहीं पहचाने पर फिर तस्दीक हो गई कि यह कल्लू ही हैं। कल्लू बोला-भाई बुलेट सर्विस का ट्रायल ले रहे थे कि तेल खत्म हो गया, भाई थोड़ा पेट्रोल मिलेगा क्या! इस सवाल और खलल से गुस्सा तो बहुत आया पर जो भी हो इसका आना पुलिस से तो ठीक ही रहा फिर भी फोकट में तेल ना देना पड़े इसीलिए एस.पी. बोले-कल्लू भाई तेल कहां होगा दोनों गाड़ियां घर के काम से बाहर गई हैं। खैर कल्लू तो निपटा महफिल फिर जमने लगी। बल्लू डीलर बोले इतना डराए के हो तो मत खेला करो में तुम लोग। कऊनो डॉक्टर थोड़ी कहीस जुआ खेलै के लिए। खेल फिर बढ़ने लगा खेलते-खेलते भूख लगना लाजमी था सो एक लोकल रेस्टोरेंट को फोन कर फोन पर ही खाने की होम डिलीवरी का आॅर्डर दे दिया गया।लगभग घंटे भर बाद गोदाम की दरवाजे की कुंडी फिर खड़की।
भूख सबको लग चुकी थी और कल्लू मिस्त्री वाले विवाद के प्रसंग से डर का भूत भी भाग चुका था फट से दरवाजा खोलते ही बबलू डीलर सामने मुखातिब व्यक्ति से बोले-खाना लाए हो उसने एक जबर झन्नाटेदार थप्पड़ बबलू डीलर के गाल पर रसीद करते हुए कहा-खाना नहीं पूरा थाना लाए हैं सभी को सांप सूंघ गया।तभी 10-12 वदीर्धारी अंदर उनके कंधे पर सजे सितारों को देखकर जुआरी भाइयों को अपने सितारे गर्दिश में नजर आने लगे। हम कोतवाली से आए हैं हमें सूचना मिली थी जुएं की जो सच भी साबित हुआ-इंस्पेक्टर बोला। किसका गोदाम घर है ये! इंस्पेक्टर की आवाज गूंजी। एस.पी.भाई की,सिवाय एस.पी.भाई के सभी ने कहा।
एस.पी. यह शब्द सुनते ही इंस्पेक्टर ने गियर बदला और बेहद विनम्र और शांति तथा अतिरिक्त आदर के भाव से कहा-सर बाकी साहबों की तरह आप भी पहले से बता देते,हमसे गलती हो गई है। सर आप कहां के एस.पी. हैं! एस.पी. भाई की आवाज हलक में फंस गई जैसे पहली बार मछली खा रहे व्यक्ति के गले में कांटा। बोले-हम तो इनवर्टर बैटरी की सप्लाई का धंधा करते हैं,हमारा नाम सूर्यप्रकाश है और सभी दोस्त यार हमें प्यार से एस.पी. कहते-बुलाते हैं। इसके बाद सातों हिंदुस्तानी जुआरी भाई जमीन पर ताश के पत्तों की तरह और यूज्ड कोरोना मास्क की तरह बिखरे-बिछे नजर आए।
एक सिपाही ने भी कहा-अरे सर देखिए यहां सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं है,और पैर से आॅपरेट होने वाली सैनिटाइजिंग मशीन भी, और सर देखिए जो गड्डी और पैसे दिख रहे हैं उन पर भी नहीं लग रहा है कि सेनेटाइजर का छिड़काव हुआ है, न छिट्टा दिखाई दे रहा मना ही खुशबू आ रही है,नामुराद जुआरी। बहरहाल लगभग 4 लाख नकद 10 अंगूठी, सोने की जंजीर आदि लेकर 8 लाख की वसूली हुई।
बहुत हाथ जोड़ने और घर-परिवार का वास्ता देने के बाद गिरफ्तारी तो नहीं पर नजराने के तौर पर छापामारी दस्ते में शामिल सभी वीरों के घर दीपावली का उजाला फैल सके इसलिए 1-1 जोड़ी नई बैटरी इंवर्टर का इंतजाम किया गया। रेस्टोरेंट की होम डिलीवरी का इंतजार अब बेकार था,सभी का पेट लात-जूते और मुक्के से भर चुका था जलालत मिली सो अलग,लंगड़ाते हुए बबलू डीलर बोले-मुखबिरी भई है,कल्लू मिस्त्री साला दिल का भी काला निकला। एस.पी. भाई तुम बिना हमसे पूछे ओका मना कर दियो आऊर ऊ झल्ल में पुलिस के कंधे पर सर रख दिहिस। अगले दिन के समाचार पत्रों में एक प्रमुख खबर छपी,लगभग बोल्ड अक्षरों में कि,पुलिस का त्वरित छापा जुआरियों में जबरदस्त हड़कंप,अंधेरे का लाभ उठाकर भागे मगर मौके से चार ताश की गड्डी रुपये 5000 नकद बरामद।
