फुस्स हो गया कांग्रेस के ‘युवराज’ का एटम बम!

आखिरकार, कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी का एटम बम ‘फुस्स’ हो गया। शुरूआती दिनों में देश से लेकर विदेश तक करोड़ों लोगों को बेसब्री से इंतजार था कि राहुल गांधी कोई बड़ा धमाका करेंगे। कथित वोट चोरी के मामले में राहुल गांधी जिस तरह से उछल-कूद कर रहे थे, निश्चित ही उनके पास कोई बड़ा क्लू हाथ लगा होगा, जल्दी ही वो कोई बड़ा धमाका करने वाले हैं। पर, इस ड्रामे का अंत निराश करने वाला ही निकला। पूरा मामला ही हास्यास्पद रहा।  भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी तंज कसते हैं- राहुल गांधी का एटम बम तो सुतली बम भी न निकला। वरिष्ठ पत्रकार अनूप शुक्ला कहते हैं कि खोदा पहाड़ और मरी चुहियां भी न निकली।  कथित वोट चोरी के मामले को लेकर बेहद आक्रामक दिखने वाले कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी फिलहाल ठंडे-ठंडे नजर आ रहे हैं। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि राहुल गांधी के एटम बम का बैकफायर कर कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचा सकता है।  आशंका इस बात की है कि बिहार के चुनाव में इसका खराब असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दल इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी के साथ नहीं दिखे।

राहुल गांधी लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में कथित वोट चोरी का हौव्वा खड़ा कर न सिर्फ बेहद आक्रामक दशा में देखे गए, बल्कि हंगामा खड़ा करने की पूरी कोशिश की। चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया से जोड़ते हुए संस्थागत तंत्र के जरिए वोट चोरी करार दे रहे थे।  राहुल गांधी लगातार भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग को न सिर्फ निशाने पर लेते देखे गए बल्कि इस दौरान बेहद आक्रामक भी नजर आए।  यहां तक कि कुछ दिनों पहले बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक की विधानसभा सीट से वोटरों के नाम अवैध तरीके से हटाए गए और महाराष्ट्र की एक विधानसभा सीट पर कई लोगों के नाम गलत तरीके से जोड़े गए।

राहुल गांधी ने 7 अगस्त, 2025 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए न सिर्फ चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर दिया बल्कि सत्तारूढ़ दल भाजपा के साथ सांठगांठ करने तक का इल्जाम मढ़ दिया। हालांकि, चुनाव आयोग ने सिरे से इस आरोप को खारिज कर दिया। बावजूद इन सबके राहुल गांधी वोट चोरी के मुद्दे को लेकर बिहार के चुनाव में वोटर अधिकार यात्रा निकालते रहे। राहुल गांधी के इस रवैए पर चारों तरफ प्रतिक्रियाओं का दौर रहा। सवाल तो यहां तक उठाया जाने लगा कि भारत में चुनाव प्रक्रिया पर क्या अवाम का भरोसा डगमगाने की यह कोई चाल है या फिर इसके पीछे भी कोई गहरी राजनीतिक साजिश है। फिलहाल, राहुल गांधी के वोट अधिकार यात्रा को लेकर जिस तरह हंगामा मचा, वह केवल सियासी मजाक बनकर रह गया है। 

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