जहां राजनीति को अक्सर सत्ता का माध्यम माना जाता है, वहीं कुछ संस्थाएं ऐसी भी हैं, जो सेवा और उत्तरदायित्व को सर्वोपरि मानती हैं। महाराष्ट्र के ठाणे (मुंबई) स्थित रामभाऊ प्रबोधिनी एक ऐसी ही संस्था है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित युवाओं को तैयार करने का कार्य कर रही है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में नेतृत्व की प्रयोगशाला माना जाता है। इसका नाम प्रसिद्ध राष्ट्रवादी विचारक और जनसेवक रामभाऊ महाडिक के नाम पर रखा गया, जो राष्ट्र सेवा, सामाजिक संगठन और विचारशील नेतृत्व के प्रतीक रहे। उनका यह मत था कि राजनीति का मूल धर्म सेवा है और सेवा का सबसे ऊंचा रूप जन-नेतृत्व है। इसी दर्शन से प्रेरित होकर स्थापित रामभाऊ प्रबोधिनी का उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो विचार से कर्म और कर्म से जननेतृत्व तक पहुंचें। प्रबोधिनी में प्रशिक्षण केवल भाषण, कला या राजनैतिक रणनीति तक सीमित नहीं, बल्कि यह समग्र नेतृत्व विकास का मॉडल प्रस्तुत करता है। सुबह शाखा, योग, सामूहिक संवाद, ग्रुप एक्टिविटी और सामुदायिक भ्रमण होता है। इनसे सेवा और अनुशासन का विकास किया जाताहै।

साक्षात्कार :-
राजेश पाटील (पूर्व प्रशिक्षु, वर्तमान पार्षद, ठाणे नगर निगम)
प्रश्न: आपने प्रबोधिनी से क्या सीखा, जो आपको सार्वजनिक जीवन में आज काम आता है?
उत्तर: मैंने सीखा कि नेता बनना आसान है, लेकिन जनप्रतिनिधि बनना कठिन। प्रबोधिनी ने मुझे जनता की बात सुनना, समझना और संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देना सिखाया।
मिलिंद पानसरे(वरिष्ठ विचारक,पूर्व प्रशिक्षक)
प्रश्न: क्या आज भी युवाओं में वैचारिक नेतृत्व की भूख है?
उत्तर: बिल्कुल है, लेकिन दिशा देने वाले मंच कम हैं। रामभाऊ प्रबोधिनी युवाओं को न केवल मंच देती है, बल्कि उन्हें विचार से जोड़ती है और यही उसकी असली ताकत है।
भाजपा और संघ के प्रभावशाली नेता प्रबोधिनी की देन भाजपा से जुड़े नाम
देवेंद्र फडणवीस (मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र)
गिरीश महाजन (वरिष्ठ भाजपा नेता)
आशीष शेलार (मुंबई भाजपा के प्रमुख नेता)
चंद्रकांत पाटिल (मंत्री, संगठनकर्ता)
विनोद तावड़े (भाजपा राष्ट्रीय संगठन सचिव) संघ परिवार से जुड़े प्रशिक्षित/संबद्ध नेता:
डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे (राज्यसभा सांसद, विचारक)
प्रवीण तोगड़िया (पूर्व विहिप अध्यक्ष)
मिलिंद पानसरे (संगठन प्रमुख)
इन नेताओं की कार्यशैली में एक साझा तत्व देखने को मिलता है और वह है अनुशासन, संवाद और जनहित पर केंद्रित दृष्टिकोण। यही प्रबोधिनी की पहचान है। रामभाऊ प्रबोधिनी के प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विचारधारा और व्यवहार को एक साथ लेकर चलता है। यहां, यह स्पष्ट किया जाता है कि नेतृत्व केवल चुनाव जीतने की प्रक्रिया नहीं है, यह समाज में उत्तरदायित्व लेने की साधना है।

नेतृत्व प्रशिक्षण में शामिल है
भारतीय संविधान का व्यावहारिक ज्ञान, भारतीय संस्कृति और विचारधारा पर सत्र, समाज में कार्य करने की नैतिकता, मीडिया संवाद और डिजिटल राजनीति की शिक्षा। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को विभिन्न समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ा जाता है, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य सर्वे, जल संरक्षण और स्वच्छता अभियान, झुग्गी-झोपड़ी (मलिन बस्ती) वाले क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण कार्य, नगर पालिका व जनसंपर्क अभियानों में भागीदारी। ये अभ्यास, उन्हें न केवल यह समझाते हैं जनता किन समस्याओं से जूझ रही है, उन्हीं की भाषा में संवाद करने की शक्ति भी देते हैं। रामभाऊ प्रबोधिनी ने भारतीय राजनीति को ऐसे नेता दिए हैं जो विचार, संकल्प व सेवा के मूल सिद्धांतों पर खरे उतरते हैं। जब राजनीति में शोर अधिक और संवाद कम होता जा रहा है, ऐसी संस्थाएं लोकतंत्र की गुणवत्ता को बनाए रखने की अदृश्य रीढ़ बन चुकी हैं। जहां नेतृत्व विचार से पैदा होता है, न कि सत्ता की भूख से। ामभाऊ प्रबोधिनी से जुड़े नेता: चरित्र से कर्म और कर्म से परिवर्तन की यात्रा। भविष्य के राजनेताओं के लिए एक वैचारिक गुरुकुल।
प्रशिक्षण की अवधि व चरण
चरण अवधि उद्देश्य
प्रारंभिक शिविर 7-10 दिन वैचारिक परिचय व नेतृत्व कौशल
माध्यमिक प्रशिक्षण 15-30 दिन नीति, जनसंपर्क, विचार-विन्यास
दीर्घकालीन आवासीय 3-6 माह व्यावहारिक, राजनीति, जनसंवाद, संगठन कौशल
